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विष्णुद्वय पुण्यतिथि

आज दिनांक 26 सितम्बर, 2019 दिन गुरूवार को विष्णुद्वय पुण्यतिथि भातखण्डे संगीत महाविद्यालय के सभा भवन मनाया गया। कार्यक्रम के अध्यक्ष डाॅ. अजय श्रीवास्तव, संचालक आधारशिला विद्या मंदिर थे जिनके कर कमलों से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। माननीय अध्यक्ष ने द्वीप प्रज्जवलन करते हुए वक्षदेवी सरस्वती को तथा विष्णुद्वय के शैलचित्रों को माल्यार्पण किया। अध्यक्ष महोदय का स्वागत महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. विप्लव चक्रवर्ती ने की।

पश्चात् महाविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा सरस्वती वन्दना तथा विष्णु स्तवन प्रस्तुत किया गया जिसमें सुभाष गुप्ता, भूमिका केसरी, श्रुति प्रभला, यश डोडवानी, संजना कश्यप, आयुष सिंह ने भाग लिया, तबले पर श्री प्रणब बंदोपाध्याय जी ने व हार्मोनियम पर डाॅ. व्ही.के. चक्रवर्ती रहे। बी.पी.ए. प्रथम सेमेस्टर के छात्र सगुन शर्मा ने अपने भाषण में भातखण्डे तथा पलुस्कर जी को आज के संगीत के महाविद्यालयीन शिक्षा के प्रणेता बताया और कहा कि आज के अव्यवस्थित युग में फिर एक भातखण्डे व पलुस्कर की जरूरत है।

माननीय डाॅ. अजय श्रीवास्तव अपने आसंदी से बोलते हुए कहा कि इस महाविद्यालय का अपना महत्व इसलिए है कि शैक्षणिक संस्थाएं केवल ज्ञान के नाम से सूचना देता है जिसे विद्यार्थी याद कर लेता है और नम्बर पा लेता है, पर उसे जिंदगी में क्या करना है, कौन सा विषय पढ़ना है इत्यादि बातें इसी महाविद्यालय के विषय सिखाते है।
डाॅ. नागराज एक न्यूराॅलाॅजिस्ट हैं तथा इस अंचल के एक मात्र मोहनवीणा वादक हैं। अपने मेडिकल प्रोफेशन से समय निकालकर मोहनवीणा भी उतने अधिकार से वादन करना उनकी वाद्य के प्रति श्रद्धा प्रदर्शित करता है। उन्होंने सर्वप्रथम राग रागेश्री बजाकर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। उनके साथ तबले पर श्री कमल मुखर्जी संगत कर रहे थे।

कार्यक्रम के दूसरे चरण में श्री सतीश इंदूरकर जो खैरागढ़ विश्वविद्यालय से संबंध हैं, ने अपना गायन पेश किया। सर्वप्रथम उन्होंने राग मारवा पश्चात् भजन व नाट्य संगीत पेश किया। भारत के कई बड़े गुरूओं से शिक्षा प्राप्त करने से उनके गायन में चैनदारी तथा प्रौढ़ता आ चुकी है, इसमें कोई संदेह नहीं।
कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय के प्राचार्य ने सभी कलाकारों, शसंकजनांे को आभार व्यक्त कर कार्यक्रम के समापन की घोषणा की।

गुरू पूर्णिमा 2019

दिनांक 21.07.2019 दिन शनिवार को भातखण्डे संगीत महाविद्यालय में गुरूपूर्णिमा का पर्व सोल्लास मनाया गया। संगीत तकनीकी विषय होने के कारण गुरू का अपना एक अलग महत्व है। गुरू का गुरू के सानिध्य में रहकर जीवन पर्यन्त रहता है। अनुशासन, विषय की परम्परा, दृढ़ संकल्प, धैर्य व नित्य गुरू के द्वारा बताए गए तरीके से अभ्यास को महत्व देकर ही इस विद्या को ग्रहण किया जा सकता है। यह प्रवाह निरंतर चलता रहता है। अतः इस विधा में गुरू की आवश्यकता व महत्व हर क्षण के लिए है। इसलिए संगीत में गुरू का स्थान भगवान के समान है। यही कारण है कि श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन गुरू पूजन की प्रथा है।

महाविद्यालय के सभी गुरूओं को विद्यार्थियों ने श्रीफल देकर सम्मानित किया तथा उनके सम्मान में सगीत के रोचक कार्यक्रम हुए। जिसमें क्रमशः सरस्वती वंदना, गुरू वंदना, कविताएं, भाषण एवं शास्त्रीय संगीत प्रस्तुत किये गये। अंत में नृत्य संकाय के विद्यार्थियों द्वारा शिवस्तुति तथा गुरू वंदना पर नृत्य प्रस्तुत किये गये।
प्राचार्य ने अपने आर्शीवचन में कहा कि शिक्षा छिन्न-भिन्न हो गई। शिक्षा के भग्नावशेष समाज में देखे जा सकते हैं। अगर देश में सबसे खराब स्थिति किसी की है तो वह है शिक्षा। जिसके कारण शैक्षणिक अस्थिरता कायम हो गई है। इसका सबसे बड़ा नुकसान विद्यार्थियों को है। विद्यार्थी भ्रमित व दिवभ्रान्त है। उन्हें क्या करना है इसके निर्णय लेने की क्षमता उनमें नहीं है। जिससे भविष्य में असफलता ही हाथ लगती है। इसलिए इस समाज को पुनः गुरूओं की अत्यंत आवश्यकता है।

प्राचार्य ने आगे विद्यार्थियों से कहा कि विद्यार्थी अपने जीवन के अच्छे निर्णायक तभी हो सकते हैं जब वे शांत रहें व चित्त को एकाग्र करें। जिसके लिए संगीत अध्ययन एक अच्छा माध्यम है।

कथक नृत्य सम्राट पंडित बिरजू महराज का कार्यक्रम

विगत 24 अप्रैल को नाट्य कला मंजरी, भातखण्डे संगीत महाविद्यालय बिलासपुर तथा बावरा मन के संयुक्त तत्वावधान में कथक नृत्य सम्राट पंडित बिरजू महराज तथा उनके शिष्यों का कथक नृत्य कार्यक्रम संपन्न हुआ। पंडित बिरजू महराज का न्यायधानी में आगमन बिलासपुर के जनता के लिए गौरव की बात है तथा बिलासपुर शहर के लिए एक इतिहास की रचना है।
कार्यक्रम बिना व्यवधान के संपन्न हो इसके लिए भातखण्डे संगीत महाविद्यालय बिलासपुर के वरिष्ठ वर्ग के छात्र/छात्राओं को नियुक्त किया गया था। प्रसन्नता की बात है कि सभी कार्यकाल (छात्र/छात्राएँ) अपने-अपने निर्दिष्ट कार्यों को सुचारू ढंग से संपन्न किया। जिसकी स्वयं नृत्य शिरोमणि पंडित बिरजू महराज ने तथा उपस्थित श्रोताओं, दर्शकों ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
छात्र/छात्राओं में - भूमिका केसरी, अर्पणा द्विवेदी, संजना कश्यप, ध्रुति श्रीवास्तव, रितुश्री राॅय, दीपक कुमार, विकास देवांगन, भानुलता कुम्भज, आयुषी तिवारी, आयुष उपाध्याय, अविनाश दास, राकेश प्रधान, सुभाष गुप्ता, विनोद सिंह क्षत्री, प्रकाश सन्नाट, दिनेश कुर्रे, दीपक साहू जिनको दिनांक 11 मई 2019 कला मंजरी नाट्य संस्था के सचिव श्री देवेन्द्र कुमार शर्मा के हाथों प्रशस्ति पत्र भेंट किये गये तथा उनके मंगल भविष्य की कामना की गई।
इस अवसर पर भातखण्डे संगीत महाविद्यालय के प्राचार्य ने कहा कि इस कार्यक्रम को सुचारू रूप से संपन्न हो जाने से यह स्पष्ट होता है कि संस्था के विद्यार्थी संगठित है तथा उनमें विषय के साथ-साथ कार्यक्रम संचालन का भी अनुभव होता जा रहा है जो उनके भविष्य में अत्यंत आवश्यक ही नहीं अनिवार्य अंग है।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षणगण, छात्र/छात्राएं तथा कला मंजरी के निदेशक श्री रितेश शर्मा उपस्थित थे।

गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2019)

प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी भातखण्डे संगीत महाविद्यालय में गणतंत्र दिवस सोल्लास बनाया गया। संस्था के प्राचार्य द्वारा ध्वज फहराए जाने के पश्चात् राष्ट्र गान हुआ।
विद्यार्थियों ने तत्पश्चात् विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए। जिसमें देशभक्ति से संबंधित कविता गीत तथा भाषण दिए गए।
कु. समरीत कौर, प्रथमा-प्रथम गायन की कनिष्ठतम् छात्रा ने देशभक्ति संबंधित कविता बड़े जोश और जुनून के साथ पढ़कर विद्यार्थियों में जोश भर दिया।
देशभक्ति से संबंधित अनेक गीत गाए गए पर कविगुरू रविन्द्र नाथ टैगोर की रचना "जोदि तोर डाक सुने केऊ ना आशे तोबे एकला चोलो रे" का गायन सबसे रोचक रहा जिसके द्वारा आत्मनिर्भरता, आत्मसंबल, तथा आत्मविश्वास का संदेश विद्यार्थियों को दिया गया। जिसमें कु. ऋतुश्री, कु. अर्पणा द्विवेदी, कु. संजना कश्यप, कु. ध्रुति श्रीवास्तव तबले पर ढोलक नाल पर श्री आशीष नाथानी तथा हारमोनियम पर श्री ऋतु श्री संगत कर रहे थे।
कु. ध्रुति श्रीवास्तव द्वारा गणतंत्र, गणराज्य तथा गण के महत्व को विद्यार्थियों के समक्ष रखते हुए अनेक सरकारी योजनाओं के उदाहरण देकर रोचक वक्तव्य पेश किया गया। विद्यार्थियों ने अंचल के एक सामाजिक छत्तीसगढ़ी गीत का गायन किया जिसमें कु. ऋतुश्री, कु. अर्पणा द्विवेदी, कु. संजना कश्यप, कु. ध्रुति श्रीवास्तव भाग लिया। हारमोनियम पर डा. व्ही.के. चक्रवर्ती तथा ढोलक नाल पर श्री आशीष नाथानी थे। अंत में प्राचार्य द्वारा कु. तनु मानिकपुरी का स्वागत किया गया जिसने संगीत की नेट तथा केन्द्रीय विद्यालय की लिखित परीक्षा प्रथम प्रयास में ही उच्च अंकों से उत्तीर्ण किया। कु. तनु मानिकपुरी ने कड़ी मेहनत, आत्म विश्वास, सतत् अध्ययन व संगीत के अभ्यास व गुरूभक्ति को इस सफलता का मुख्य कारण बताते हुए सभी से उपरोक्त गुणों को अपने में सजाने का आग्रह किया। अंत में मिष्ठान्न वितरण व प्राध्यापिका श्रीमती ममता चक्रवर्ती द्वारा आभार के साथ कार्यक्रम के समापन की घोषणा की गई।

जलतरंग का आकर्षक कार्यक्रम

शहर के प्रतिष्ठित संस्थान आधारशिला विद्या मंदिर में स्पिक मैके के द्वारा आयोजित जलतरंग का कार्यक्रम दिनांक 25.01.2019 को आयोजित हुआ।
पुणे से आए श्री मिलिंद तुलनकर जलतरंग के एक सिद्धहस्त कलाकार है। इस अप्रचलित होते हुए वाद्य को उन्होंने अपने दादा शंकर कानेरे से सीखा तथा तब से अब तक देश के भीतर ही नहीं बल्कि आस्ट्रिया, फ्रांस, कनाडा, अमेरिका, जापान, ताइवान, इंडोनेशिया इत्यादि पाश्चात्य शहरों में अपने कार्यक्रम पेश कर इस वाद्य को पुनर्जिवित किया।



केवल इतना ही नहीं यह कलाकार मोरचंग (मुखचंग) का अच्छा कलाकार है। मोरचंग से विभिन्न प्रकार के रिदम निकालने का कौशल देखकर लोग भाव-विभोर हो गए। दर्शकों व श्रोताओं ने ऐसा विरला कलाकार पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने जानकारी दी कि वे घर में निर्मित काष्ठ तरंग जल तरंग इत्यादि वाद्यों को बनाऐ है व बजाते है।
जलतरंग में चीनी मिट्टी की कटोरियों में जल भरकर बजाया जाता है। वादन के समय कटोरियों के हिलने व पानी छलकने का डर जाता है। कटोरियों को प्रहार करने के लिए बेत में विभिन्न प्रकार के स्टिकर पर टेप लगाना सर्वप्रथम इन्हीं का आविष्कार है जिससे स्वर के विभिन्न टोनल क्वालिटी प्राप्त हो सके। जलतरंग में स्वर में आस नहीं पाया जाता जिसके लिए आबनस के बेत का इस्तेमाल भी इन्हीं का आविष्कार है। ये पूर्व के कलाकार में देखा नहीं गया। इसके अलावा उन्होंने जलतरंग व उसके उपयोग में आने वाले पानी के बारे में कई रोचक बाते बताई।

स्पीक मैके के उदस्य के अनुसार सभी कार्यक्रम लेक्चर डिमाॅन्स्ट्रेशन होते है। इसी को सामने रखते हुए श्री मिलिंद तुलनकर जी ने कुछ फिल्मी गानों के धुन को जल तरंग में बजाकर विद्यार्थियों में वाद्य के प्रति रूचि जगाई। पश्चात् उन्होंने राग गुर्जरी तोड़ी में त्रिताल तथा एकताल में दो बंदिश सुनाई, कलाकार के आलाप, जोडे़, झालों की तैयारी बेजोड़ है इसमें कोई संदेह नहीं!



इसके पूर्व जलतरंग जैसे वााद्य का कार्यक्रम बिलासपुर में नहीं हुआ अतः भातखण्डे संगीत महाविद्यालय के स्नातक-स्नातकोत्तर स्तर के छात्र-छात्राओं को इसे सुनके की तीव्र इच्छा थी अतः महाविद्यालय के विद्यार्थी तथा शिक्षणगण भी उपस्थित थे तथा कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना सक्रिय सहयोग दिया।
कार्यक्रम का समापन प्राचार्य श्रीमती शुभदा जोगलेकर के आभार प्रदर्शन से हुआ।

Auto Expo & Education Fair

In recent back days i.e. from 4-6th April 2014 Auto Expo & Education Fair was organised in C.M.D. College ground by Navabharat, the popular hindi daily news paper, Bilaspur edition. The musical events were the attraction & the part of the fest to entertain the visitors.
On the occasion, one day musical programme was organized by the students of our institution. The students and he college staff participated in the events with full swing, energy & vigour. As April month is the time for admissions in all the institutions, an option was given to the schools & colleges by this news paper to open their stalls to advertise their courses and specialisation in the fest & to make them popular amongst the parents, students & visitors. For the first time the college hired a stall to Ad the various courses specially the degree & postgraduate courses amongst the students along with few vocational courses which are to be brought into force in near future. The stall was decorated by musical posters & banners by the students.
Lucky draw & drawing competition was also the attractive part of the programme. Our student & had active participation & have won the prizes of the lucky draw. The lucky draw was opened by Shri Amar Agrawal, Minister of Health affairs, Govt of Chhattisgarh, Raipur (C.G.).
About 50 quarries came in three days which was itself a record in the stall. Those who were interested for admission were provided pamphlets & brochures to satisfy their quarries. Thus college expects fairly better admission in coming academic session.
Navabharat issued “Certificate of Participation” to the institution. The total events organised including musical programme was a grand success.

Oddissi & Bharatnatyam Dance Programme

A dance performance in duo of Sushri Jahannavi Behra, the exponent of Oddissi & Sushri Medini Homble the Bharatnatyam exponent was staged in Bhatkhande Sangeet Mahavidyalaya, auditorium. The programme was staged in the joint banner of Bhatkhande Sangeet Mahavidyalaya & SPICMACAY Bilaspur chapter by the help of Rajeev Shiksha Mission.
The programme was srarted after the inaugural address of both the principal & state convenor & Chairman Dr Ajaya Shrivastava. In his address Dr. Shrivastava said “It is the programme by the youth, for the youth so that they interact with the artists of high profile, which help them to develop good leadership. Not only that fine arts is a good media to nurture good habits trends & thinking. It is also a good media to know our culture & traditions. Which is the first necessity nowadays”.
The students of the institution & the outsiders enjoyed the programme. Though both the dance styles are contemporaries but it laid a thinking of joint performance of Oddissi & Bhatatnatyam dance style, the concept & fusion in classical dance styles of this, were not thought before.

Manna Dey Commemoration Programme

The college celebrated Manna Dey Commemoration Programme as the great music maestro passed away on 24th of Oct. in Bangalore. The “swaranjali” programme was arranged in memory of the great play back singer & music maestro late Manna Da.
Total 50 students of institution participated & rendered songs of films of various mood & situations of various films & they also rendered songs of the great maestro to pay homage to their beloved one.
This is only Manna Dey who laid down & started the tradition of classical based music & songs in the films, which is a good sign that students are taking interests in classical based film songs, as this may definitely create good environment for classical music amongst the youth.
The unique feature of this programme was that the whole presentation covered the total spectrum & styles of music changed time to time starting from 1940 till date, due to various social circumstances & the different styles of music compositions made by the then music directors.
The students were very much encouraged by the orchestra accompaniment given to their renditions, as it was a new & interesting experience for them.

Guru Purnima Utsava-2013

Last 22nd of July the college celeberated ”Guru Purnima Utsava”. As the general trend, the celebration was in its traditional form, as it is since the inception of the college, but at this time programme was chalked out in different way with a new perspective-“The importance of Gurus in different Religions” prevailing in India.
The students of Dept. of Vocal Music performed the songs of devotion with their existence meaning & importance. As it was a new & unique concept, the first time different colours & shades of devotions were observed in the performance of the students.
Students of Dept of Dance showed the importance of guru through their performance very cleverly with the religious temperament in Kathak dance style.
The programme was concluded by with owing thanks to all participant & teachers.